खादी रुमाल की सिलाई एक रुपये बढी, पाँच करोड़ बिकेगा


नयी दिल्ली 17 जनवरी (वार्ता)। खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग (केवीआईसी) ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से प्रभावित महिलाओं द्वारा तैयार किये जाने वाले खादी के रुमाल की सिलाई दर प्रति पीस एक रुपये बढ़ा दी है।
आयोग के अध्यक्ष वी.के. सक्सेना ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नितिन गडकरी के सुझाव के आलोक में एक जनवरी से खादी के रुमालों की सिलाई दर दो रुपये से बढ़ाकर तीन रुपये कर दी है। इससे इस काम में लगी महिलायें प्रतिदिन औसतन 250 से 300 रुपये कमा सकेंगी। ये महिलायें लगभग चार घंटे में 85 से 90 रुमाल तैयार करती हैं और करीब पहले 170 से 180 रुपये प्रतिदिन कमा लेती थीं।
उन्होंने बताया कि इस साल के अंत तक पाँच करोड़ रुमाल बेचने का लक्ष्य तय किया गया है। गत 17 दिसम्बर के बाद आयोग ने जम्मू-कश्मीर के नागरोटा केन्द्र से करीब 30,000 रुमालों की खरीद की गयी है। वर्तमान में 130 महिलायें रुमाल तैयार करने के कार्य में जुटी हैं और प्रतिदिन यहां 10,000 रुमाल तैयार किये जाते हैं। आयोग की योजना खादी रुमाल की बिक्री बढ़ने के साथ चार हजार महिलाओं को इसके माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की है।सूती खादी रुमाल देश में खादी की दुकानों पर बेचे जाते हैं। खादी रुमालों की बढ़ती उपलब्धता और माँग को देखते हुये ‘पेटीएम’ ऑन लाइन दो करोड़ रुमालों की बिक्री के लिए सहमत हो गया है।
श्री सक्सेना ने बताया कि इस वर्ष के अंत तक पाँच करोड़ पीस खादी रुमाल की बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 15 लाख किलोग्राम कपास की जरूरत होगी। इनकी कताई के लिए 25 लाख मानव दिवस, बुनाई के लिए 12.5 लाख तथा कटाई, सिलाई एवं पैकेजिंग के लिए 7.5 लाख मानव दिवस की आवश्यकता होगी। इसके लिए अलग-अलग दस्तकारों को करीब 88 करोड़ रुपये पारिश्रमिक दिये जायेंगे।
आयोग के अध्यक्ष के अनुसार, बाजार में ब्रांडेड रुमाल कुछ स्थानों पर प्रति पीस एक सौ से दो सौ रुपये में उपलब्ध है जबकि बेहतरीन किस्म के खादी के रुमाल की कीमत 50 रुपये है। उन्होंने लोगों से कम से कम खादी का एक रुमाल खरीदने की अपील की।
कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लोगों से कम से कम खादी का एक रुमाल खरीदने की अपील की थी।