हरियाणा में 2025 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत तक कमी लाने की नई नीति:शर्मा

नयी दिल्ली, 16 जनवरी (वार्ता) हरियाणा के परिवहन मंत्री मूलचन्द शर्मा ने कहा है कि राज्य में अगले पांच वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत तक कमी लाने के उद्देश्य से एक सड़क सुरक्षा नीति बनाई गई है और राज्य सरकार परिवहन विभाग के माध्यम से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसन्धान और सड़क सुरक्षा की ‘विजन जीरो’ योजना पर कार्य कर रही है।
श्री शर्मा ने गुरूवार को यहां राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद की 18वीं बैठक तथा यातायात विकास परिषद की 39वीं बैठक में हिस्सा लेते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के अध्ययन के लिए प्रदेश के सभी जिलों में सड़क सुरक्षा साथी नियुक्त किए गए है ताकि जिला प्रशासन के समन्वय से सड़क सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने के कड़े कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में गम्भीर सड़क दुर्घटनाओं और इनसे होने वाली मौतों की जांच के लिए टीमों का गठन किया गया है, जिसमें परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों और हरियाणा विजन जीरो कार्यक्रम के तहत लगे सड़क सुरक्षा एसोसिएट द्वारा वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाती है।
श्री शर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 के मुकाबले वर्ष 2019 में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना में राज्य सरकार ने सड़क सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग में लीड एजेंसी का गठन किया है जिसमें परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, योजना और गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। ।
परिवहन मंत्री ने बताया कि हरियाणा सड़क सुरक्षा कोष बनाया गया है। इसके अंतर्गत मोटर वाहन अधिनियम के तहत विभिन्न अपराधों के चालानों की फीस का 50 प्रतिशत शुल्क सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों में खर्च किया जा रहा है। राज्य में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित स्कूल वाहन नीति तैयार की गई है और स्कूलों में सड़क सुरक्षा पाठ्यक्रम लागू किया गया है तथा स्कूल और कालेजों में भी कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।
केन्द्रीय सडक़ परिवहन तथा राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में केन्द्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के.सिंह सहित असम, गोवा, कर्नाटक, उड़ीसा और राजस्थान के परिवहन मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया।