विश्व को आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए आकलन करना होगा : जयशंकर


नयी दिल्ली, 15 जनवरी (वार्ता) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दुनिया को इस समस्या से कैसे निपटना है इसका आकलन करना होगा।
श्री जयशंकर ने रायसिना डायलॉग में कहा,“दुनियाभर में कई सामान्य चुनौती है जिसमें आतंकवाद, अलगाववाद और प्रवासी एक सामान्य चुनौती है। इसलिए यह मत सोचिए कि ये समस्याएं भारत के लिए अनोखी हैं।”
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और कश्मीर नीति के अन्य पहलुओं पर मोदी सरकार के रुख पर वैश्विक प्रतिक्रिया को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सामना की जा रही चुनौतियों का एक हिस्सा है और मुझे लगता है कि जब लोग इसे देखते हैं, इसका आकलन करते हैं और इसका विश्लेषण करते हैं, तो उन्हें निष्पक्षता से खुद से पूछना चाहिए कि वह इसका किस तरह से इसका जवाब देंगे।”
विदेश मंत्री ने कहा, “कई बड़े देश हैं जिनके पड़ोस में अशांति है। जैसे यूरोप ने इसे उत्तरी अफ्रीका में देखा है। ज्यादातर लोगों ने इसे 9/11 के समय देखा तो उन सभी ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी। जब आप भारत जैसे देश को देखते हैं, जो इन सामान्य चुनौतियों से निपट रहा है, तो इसे संभालने के अपने पूरे तरीके पर विचार करना महत्वपूर्ण है।”


विदेशी नागरिकों को नागरिकता देने के मसले की चर्चा करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आकलन करना होगा तथा इसपर अपनाये गये तरीके पर प्रतिक्रिया व्यक्त करनी होगी।
विदेश मंत्री ने कहा,“विदेशी नागरिकों को नागरिकता देने पर अन्य देशों ने क्या रास्ता अपनाया है ... यह देखने योग्य है। इन सभी पर वैश्विक मापदंड क्या हैं?”
डॉ.जयशंकर ने कहा,“दिन के अंत में, (इन मुद्दों से निपटना) भी शासन के प्रति मानसिकता को दर्शाता है। पिछले छह महीनों में जो कुछ हुआ है, वह बहुत कुछ राजनीतिक क्षेत्र में है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक मुद्दों में भी वही मानसिकता स्पष्ट है। बाद में यह लिंग भेद, स्वच्छता, शहरीकरण ... आदि जैसे मुद्दों पर आया।”
डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह सच है जब वह विदेश में होते हैं तो उनसे ऐसे सवालों को पूछा जाता है। उन्होंने कहा,“इस संसार में कोई भी ऐसा देश नहीं है, जहां कोई समस्या नहीं है।”
उन्होंने कहा,“लोग राय रखने के हकदार हैं, लेकिन दूसरे लोग भी अपनी राय रखने के उतने ही हकदार हैं ... इसलिए मुझे लगता है कि जीवन दोतरफा सड़क के समान होनी चाहिए।” इसके साथ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों में समाधान का रास्ता ढूंढा जाना चाहिए।
डॉ.जयशंकर ने कहा,“निश्चित रूप से यह मेरा राजनीतिक दृष्टिकोण, सरकार और मेरी पार्टी का भी राजनीतिक दृष्टिकोण है।”