आर्थिक राहत पैकेज की योजनाओं को लेकर शेयर बाजारों में बढ़त


लंदन। कोरोना वायरस से फैली महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को दूर करने के लिये विश्व भर में सरकारों तथा केंद्रीय बैंकों के उपायों के दम पर शुक्रवार को दुनिया भर के शेयर बाजारों में उथल-पुथल भरे सप्ताह का समापन हल्की तेजी के साथ हुआ।


 यूरोपीय बाजारों में यूरोपीय केंद्रीय बैंक द्वारा इस सप्ताह उपायों की घोषणा करने के बाद जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के शेयर बाजार दो से चार प्रतिशत के बीच बढ़त में रहे। बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा मुख्य ब्याज दर को 0.1 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर लाने तथा सरकार द्वारा राहत पैकेज की घोषणा के बाद लंदन के शेयर बाजार में करीब दो प्रतिशत की तेजी रही।



अमेरिका में प्राधिकरणों के राहत पैकेज पर तेजी से काम करने से वॉल स्ट्रीट में भी उत्साह देखा गया और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज कारोबार की शुरुआत के कुछ ही मिनटों में 0.5 प्रतिशत चढ़ गया।

 स्कोप मार्केट्स के विश्लेषक जेम्स ह्युग्स ने एएफपी को बताया, ‘‘शेयर बाजारों की यह तेजी केंद्रीय बैंकों द्वारा कई बड़े राहत देने का परिणाम है।’’उन्होंने कहा, ‘‘बाजार अनिश्चितता को पसंद नहीं करता हैऔर हम अधिक समय तक अनिश्चित माहौल में रह भी नहीं सकते हैं। कुल मिलाकर मुझे लगता है कि बाजार निकट भविष्य में उबर सकता है, लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि यह एक ऐसा सप्ताह रहा है जिसमें संकट अप्रत्याशित तौर पर सघन होता गया। कौन जानता है, अगले सप्ताह क्या होने वाला है!’’यूरोपीय संघ के सदस्य इटली में कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या बृहस्पतिवार को चीन से भी अधिक हो गयी। इटली में अब लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है।


 यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने इस सप्ताह 750 अरब यूरो यानी 820 अरब डॉलर के भारी-भरकम राहत पैकेज की घोषणा की है। अमेरिका में सीनेट के बहुमत के नेता मिच मैककॉनेल ने एक हजार अरब डॉलर के राहत पैकेज की पेशकश की। स्प्रेडेक्स के विश्लेषक कॉनर कैम्पबेल ने कहा कि यूरोपीय बाजार इस सप्ताह बढ़त के साथ बंद होने की राह पर हैं।


 इस बीच डॉलर पिछले सप्ताह चढ़ने के बाद अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में नरम चल रहा था।हालांकि, कच्चे तेल में सुधार नहीं हुआ। ब्रेंट क्रूड का वायदा 30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे चल रहा था, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियेट 25 डॉलर प्रति बैरल से नीचे था।इस साल कच्चा तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक गिर चुकी हैं।